11 Mothers Day Hindi Poems Latest 2020 (Show your love)

Mother’s Day Hindi Poems: Mother’s day is quite close and today I am going to share some heart touching and loving Mothers Day Hindi Poems with you guys. You guys can write these poems or these 19 amazing happy mothers day greetings on a card and dedicate to your mother. A poem is the best way to express our feelings, love and gratitude to our mom. Share these magnificent Mothers Day Hindi Poems with your mom and tell her how special she is for you on this mother’s day.

Mothers Day Hindi Poems (Tell Her How Special She Is)

#1  वो है मेरी माँ।

वो है मेरी माँ

मेरे सर्वस्व की पहचान

अपने आँचल की दे छाँव

ममता की वो लोरी गाती

मेरे सपनों को सहलाती

गाती रहती, मुस्कराती जो

वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो

सागर सारा अश्कों में जो

हर आहट पर मुड़ आती जो

वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती

सुख की खुशबू बिखेर जाती

ममता की रस बरसाती जो

वो है मेरी माँ।

 

#2  ममता की मूरत

ममता की मूरत

क्या सीरत क्या सूरत थी

माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने

अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में

एक अहम ज़रूरत थी

सच कहते हैं माँ हमको

तेरी बहुत ज़रूरत थी

 

#3 अंधियारी रातों में

अंधियारी रातों में

अंधियारी रातों में मुझको

थपकी देकर कभी सुलाती

कभी प्यार से मुझे चूमती

कभी डाँटकर पास बुलाती

कभी आँख के आँसू मेरे

आँचल से पोंछा करती वो

सपनों के झूलों में अक्सर

धीरे-धीरे मुझे झुलाती

सब दुनिया से रूठ रपटकर

जब मैं बेमन से सो जाता

हौले से वो चादर खींचे

अपने सीने मुझे लगाती

 

#4 माँ की ममता

माँ की ममता

जन्म दात्री

ममता की पवित्र मूर्ति

रक्त कणो से अभिसिंचित कर

नव पुष्प खिलाती

स्नेह निर्झर झरता

माँ की मृदु लोरी से

हर पल अंक से चिपटाए

उर्जा भरती प्राणो में

विकसित होती पंखुडिया

ममता की छावो में

सब कुछ न्यौछावर

उस ममता की वेदी पर

जिसके

आँचल की साया में

हर सुख का सागर!

 

#5 मेरी प्यारी माँ तू कितनी प्यारी है

मेरी प्यारी माँ तू कितनी प्यारी है

जग है अंधियारा तू उजियारी है

शहद से मीठी हैं तेरी बातें

आशीष तेरा जैसे हो बरसातें

डांट तेरी है मिर्ची से तीखी

तुझ बिन ज़िंदगी है कुछ फीकी

तेरी आंखो में छलकते प्यार के आंसू

अब मैं तुझसे मिलने को भी तरसूं

माँ होती है भोरी भारी

सबसे सुन्दर प्यारी प्यारी

 

#6 माँ की ममता करुणा न्यारी

माँ की ममता करुणा न्यारी,

जैसे दया की चादर

शक्ति देती नित हम सबको,

बन अमृत की गागर

साया बन कर साथ निभाती,

चोट न लगने देती

पीड़ा अपने उपर ले लेती,

सदा सदा सुख देती

माँ का आँचल सब खुशियों की,

रंगा रंग फुलवारी

इसके चरणों में जन्नत है,

आनन्द की किलकारी

अदभुत माँ का रूप सलोना,

बिलकुल रब के जैसा

प्रेम के सागर सा लहराता,

इसका अपनापन ऐसा….

 

#7 माँ आँखों से ओझल होती,

माँ आँखों से ओझल होती,

आँखें ढूँढ़ा करती रोती।

वो आँखों में स्‍वप्‍न सँजोती,

हर दम नींद में जगती सोती।

वो मेरी आँखों की ज्‍योति‍,

मैं उसकी आँखों का मोती।

कि‍तने आँचल रोज भि‍गोती,

वो फि‍र भी ना धीरज खोती।

कहता घर मैं हूँ इकलौती,

दादी की मैं पहली पोती।

माँ की गोदी स्‍वर्ग मनौती,

क्‍या होता जो माँ ना होती।

नहीं जरा भी हुई कटौती,

गंगा बन कर भरी कठौती।

बड़ी हुई मैं हँसती रोती,

आँख दि‍खाती जो हद खोती।

शब्‍द नहीं माँ कैसी होती,

माँ तो बस माँ जैसी होती।

आज हूँ जो, वो कभी न होती,

मेरे संग जो माँ ना होती।।

 

#8 चुपके चुपके मन ही मन में

चुपके चुपके मन ही मन में

खुद को रोते देख रहा हूँ

बेबस होके अपनी माँ को

बूढ़ा होता देख रहा हूँ

रचा है बचपन की आँखों में

खिला खिला सा माँ का रूप

जैसे जाड़े के मौसम में

नरम गरम मखमल सी धूप

धीरे धीरे सपनों के इस

रूप को खोते देख रहा हूँ

बेबस होके अपनी माँ को

बूढ़ा होता देख रहा हूँ………

छूट छूट गया है धीरे धीरे

माँ के हाथ का खाना भी

छीन लिया है वक्त ने उसकी

बातों भरा खजाना भी

घर की मालकिन को

घर के कोने में सोते देख रहा हूँ

चुपके चुपके मन ही मन में

खुद को रोते देख रहा हूँ………

बेबस होके अपनी माँ को

बूढ़ा होता देख रहा हूँ…..

 

#9 मैंने माँ पुकारा जो तुम्हें है

घुटनो पर खेलते-खेलते बड़ा किया है तुमने,

मन न हो फिर हर पल हसया है तुमने,

कभी गुस्सा, कभी तकरार हुई….

फिर भी मैंने अपना दिल दिया है तुम्हे.

लोरी सुनकर, सुलाया तुमने मुझे है,

गिरने से उठना सिखाया तुमने है….

प्यार यह अजीब नहीं बस थोड़ा अनोखा सा है,

हो भी कैसे न?

मैंने माँ पुकारा जो तुम्हें है…..

 

#10 भगवान् का दूसरा रूप हैं माँ

भगवान् का दूसरा रूप हैं माँ,

उनके लिए दे देंगे जां,

हमको मिलता हैं जीवन उनसे,

कदमों में हैं स्वर्ग बसा,

संस्कार वह हमें सिखलाती,

अच्छा बुरा हमें बतलाती,

हमारी गलतियों को सुधारती,

प्यार वह हम पर बरसाती,

तबियत अगर हो जाए ख़राब,

रात – रात भर जागते रहना,

माँ बिन जीवन हैं अधुरा,

खाली खाली सुना सुना,

खाना पहले हमें खिलाती,

बादमें वह खुद हैं खाती,

हमारी ख़ुशी में खुश हो जाती,

दुःख में हमारी आंसू बहाती,

कितने खुशनसीब हैं हम,

पास हमारे हैं माँ,

होते बदनसीब वे कितने,

जिनके पास न होती माँ.

 

#11 हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….

कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..

हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..

अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……

हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….

जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…..

दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..

खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….

प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..

बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……

रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….

लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….

भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ